सोमवार, 24 मई 2021

Himachal में trekking करने से पहले जान लें ये नियम

बात अगर खूबसूरत वादियों वाले Himachal_Pradesh की हो तो दिमाग में एक ही बात आती है वो है घूमना। सैर-सपाटा कौन नहीं करना चाहता। कोई family के साथ बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच किसी cottage या resort में फुर्सत के पल बिताना चाहता है तो कोई biking या SUV लेकर हरी-भरी घाटियों के बीच घुमावदार और सुंदर सड़कों पर Long drive करना पसंद करता है। इनके बीच एक और कैटेगरी है वो है ट्रैकिंग करने वालों की....।

शहर की भीड़भाड़ से दूर, पहाड़ के घने जंगलों की पगड़डियों के बीच, मन में रोमांच को भरकर दूर तक चलना, बीच में रुक-रुक कर खूबसूरत वादियों को निहारना, कलकल करती नदियों के म्यूजिक में डूब जाना, जंगल का सन्नाटा तोड़ते झरनों में भीगना, पेड़ों के झुर्मुटों में अचानक किसी आहट को महसूस कर सिहर उठना और फिर रोमांच का डबल हो जाना, आसमान में अटखेलियां करते हुए पक्षियों को कैमरे में कैद करना और फिर पगडंडियों पर उतर आए बादलों के बीच खो जाना, कहीं refreshment और energy बटोरने के लिए रुक कर camping कर लेना और फिर किसी पहाड़ की चोटी को लक्ष्य बनाकर उसपर पहुंचकर विजय को महसूस कर अपनी ताकत और confidence पर इतराना....इन्हीं खूबसूरत पलों का नाम ही तो ट्रैकिंग है। कई लोग सोलो यानि अकेले trekking करना पसंद करते हैं तो कुछ groups में करते हैं। ट्रैकिंग को लेकर पिछले कुछ साल के दौरान युवाओं में craze बढ़ा है। अब युवा तो इसे करियर बनाकर बिजनेस तक कर रहे हैं तो कई लोगों में ये पैशन की जगह ले चुका है। ट्रैकिंग करने के लिए किसी जगह की पूरी जानकारी न हो तो ये adventure और thrill काफी काफी महंगा भी साबित हो जाता है। जंगल में भटकने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इस तरह के हादसे अक्सर सामने आते रहे हैं। फ्यूचर में इस तरह की कोई घटना न हो, इसके लिए हिमाचल प्रदेश में ट्रैकिंग करने वालों के लिए नया नियम आ गया है। अगर हिमाचल प्रदेश में ट्रैकिंग करना चाहते हैं तो अपने साथ GPS system रखना होगा। इससे ट्रैकिंग दल को आसानी से ढूंढा जा सकेगा। यदि कोई ट्रैकर एक दिन से ज्यादा समय के लिए ट्रैकिंग करने, camp लगाना, tent लगाना चाहता है तो वन विभाग से इसकी मंजूरी लेनी होगी। ट्रैकिंग का समय सुबह सात से शाम सात बजे तक होगा। जाने से पहले और आने के बाद नजदीकी पुलिस थाने या चौकी में जानकारी देनी जरूरी होगी। 

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साभार 
इस स्टोरी को लिखना, विश्व की सबसे ऊंची चोटी Mt. Everest फतेह कर चुकी Mamta Sodha के सहयोग के बिना संभव नहीं था। सुश्री ममता ने साल 2010 में माउंट एवरेस्ट फतेह किया था और इस समय हरियाणा पुलिस को सेवाएं दे रही हैं। उनका विशेष धन्यवाद...। साथ ही अरविंद बिश्रोई का भी आभार..। अरविंद पेशे से चंडीगढ़ में पत्रकार हैं और ट्रैकिंग के प्रति काफी संजीदा हैं। 

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