शुक्रवार, 23 मई 2008

कब आएगा शेर..... !

दैनिक जागरण के बहु प्रतीक्षित मोहाली एडिशन के शुरू होने की ख़बरें फ़िर से फैलनी शुरू हो गई हैं ताज़ा ख़बर है की मोहाली एडिशन इसी साल के अक्टूबर-नवम्बर में छापने की चर्चा है, जिसका आगाज़ करने वाली टीम में संस्थान के ही तीन वरिष्ट लोगो को लुधियाना से चंडीगढ़ भेजा गया है। ये लोग हैं, सुशील खन्ना (डी एन ई ), चन्द्रशेखर (चीफ सब एडिटर) और गौरव तंवर (सीनियर सब एडिटर)। सूचनाये हैं की जल्द ही सात-आठ और लोग चंडीगढ़ डेस्क पर विराजमान हो जायेंगे। जो भे होगा उसकी उसकी ताज़ी जानकारी ब्लॉग चास्केबाजों को मिलती रहेगी। आप भे इस चसके मे आहूति डालो। वैसे भी यह इस लिए ज़रूरी हे की दैनिक जागरण का मोहाली एडिशन अब तक शेर आ गया वाली कहावत पर ही टिका हुआ है।

रविवार, 18 मई 2008

समय रहेगा हाथ मे

मेरे साथ है
हादसों से भरा पूरा विश्व
हादसों का ज़िक्र नही
भय है मेरा लिखा न बन जाए
अखबारों का प्रष्ठ !
यों भी समकालीनता हादसों से परिभाषित नही होती बन्धु।
समय के झुलसे-अनसुलझे रहस्यों
का ब्योरा, /शताब्दियों मे करना दर्ज
महज होगा, / इतिहास का कोरा-दस्तावेज़।
समय रहेगा हाथ मे तो
हादसे होंगे तंग
समकालीनता का दावों का
कही तो होगा ढंग!
समय रहेगा हाथ मे तो
हादसे होंगे तंग
के-
समकालीन हादसों को
हाशिये मे करेगी बंद।
पर जब-
समय रहेगा हाथ मे।


-रचना: डाक्टर मीरा गौतम,
प्रोफेसर, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी
(हरियाणा)

शनिवार, 17 मई 2008

खुश नही रॉक गार्डन के निर्माता

बीच-बीच मे उठने वाली बात इक बार फिर सुर्खियों में है। विश्व प्रसिद्ध चंडीगढ़ के रॉक गार्डन के निर्माता नेक चंद को मलाल है की वो इक और रॉक गार्डन नही बना पाये। अपनी अनूठी परिकल्पना और सर्जन के धनि नेक चंद ने कबाड़ या फिर कूड़े मे फेकी जाने वाली वस्तुओं को खूबसूरत आकार देकर दुनिया मे नाम कमाया लेकिन अफसरशाही की उपेक्षा उनके गले से नीचे नही उतर रही है। वे अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से आह़त महसूस कर रहे थे की अब नई दिल्ली और केरल मे रॉक गार्डन के निर्माण को लेकरवहा के प्रशासनों के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार ने इस बड़े कलाकार को चोट पहुंचा दी है। वर्ष २००० मे दिल्ली देवेल्पोमेंट अथॉरिटी ने २००० एकड़ इलाके मे तो दूसरी तरफ़ इसी तुरह की मदद केरल सरकार ने वर्ष १९९६ मे उनसे मांगी थी। उस समय उमीदे थी कि चूकि पर्यटन उद्योग लगातार फल फूल रहा है । इसमे निजी क्षेत्र के अलावा सरकारें भी दिलचस्पी ले रही हैं तो जल्द ही दुनियाभर के पर्यटकों को सिर्फ़ चंडीगढ़ ही नही बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और दक्षिण भारत में भी इस अनूठे कला संसार के दर्शन हो जायेंगे। लेकिन हमेशा कि तरह यहाँ भी लाल फीताशाही आड़े आई और बुजुर्ग नेकचंद कलाकार दिल टूट गया है। पिछले दिनों लम्बी बीमारी से उठे नेकचंद के लिए इस तरह की सरकारी उपेक्षाएं कोई नई बात नही है, सवाल यह उठता है कि क्या नेकचंद ने अपनी कला के बल पर चंडीगढ़ को रॉक गार्डन जैसी नायाब धरोहर देकर विश्व के पर्यटन नक्शे पर लाकर कोई गुनाह किया है?